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Wonders of Wim Wenders – “Paris Texas”

विम वेंडर्स की 1984 में आई “पेरिस,टेक्सास” 110 सालों से चले आ रहे अमेरिकी स्टाइल से बिलकुल परे की फ़िल्म है। अमरीका के टेक्सास में शूट हुयी और अंग्रेजी में बनी “पेरिस,टेक्सास”, विम वेंडर्स की तेहरवीं फिल्म है। वेंडर्स जर्मन के रहने वाले हैं और “पेरिस,टेक्सास” अमनेशिया का शिकार हुए टेर्विस की कहानी है जो 4 साल गुम रहने के बाद अपने घर लौटता है। कैसे वो अपने बेटे को पाता है, उसकी माँ को ढूँढने की कहानी और बाप बेटे के रिश्ते का गठन, यह “पेरिस,टेक्सास” का मूल है।
2 विश्व युद्ध देखने के बाद जर्मन बुरी हालात में रहा । लाखों लोग कभी घर को लौटे ही नहीं, और करोड़ों अपने सगे सम्बन्धियों का राह देखते रहे। विम भी 1945 में पैदा हुए और ज़ाहिर उन्होंने आस पास दूसरे विश्व युद्ध के बचे खुचे से जर्मन को खड़े होते देखा होगा।अक्सर बाल मनों पर त्रासदी का गहरा असर होता है और वह ता-उम्र रहता है।

 

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1966 में कॉलेज ड्राप आउट रहे वेंडर्स को पेरिस के मशहूर फ़िल्म संस्थान ‘ला फेमिस्’ में भी जगह नहीं मिली।फिर एक स्टूडियो के साथ जुड़े।
“पेरिस,टेक्सास” फ़िल्म 1984 के कान्स फ़िल्म समारोह में गोल्डन पाम अवार्ड हासिल कर चुकी है। विम वेंडर्स फ़िल्म सर्किल में ज्यादातर documentaries के लिए जाने जाते हैं। Room 666, Buena Vista Social Club इत्यादि उनकी सबसे चर्चित documentaries रही हैं।
“पेरिस,टेक्सास” फ़िल्म एक रोड मूवी की तरह है पर इसके हाशिये में एक आदमी के ख़लाअ की कहानी भी है। विम वेंडर्स ने बहुत ही नयूनतम बजट में फ़िल्म बनाई है और नए फिल्मकारों के लिये यह फ़िल्म किसी वर्कशॉप से कम नहीं है। वह इसके एक एक सीन को खोल कर काफी कुछ सीख सकते हैं। पिछले साल रिलीज़ हुयी रिचर्ड लिंकलेटर की boyhood भी जरूर Paris,Texas से कहीं ना कहीं प्रभावित रही होगी। मेहज़ 4 किरदारों से ढाई घंटे की फ़िल्म, वह भी सिर्फ इंसानी ख़लाअ पर आधारित, बहुत ही कलाकारी चाहिये भाई।
यह फ़िल्म, ट्रेविस नामी किरदार का एक मज़ेदार character study है जिसको लिखा है Pulitzer Prize जेतू नाटककार “सैम शेपर्ड” ने और इस किरदार को विश्वसनीय निभाया है Harry Stanton ने। Harry का चेहरा भी फ़िल्म में उसी लैंडस्केप जैसे व्यतीत होता है जिसमें पूरी फ़िल्म दौड़ती रहती है।
Wim wenders न्यू जर्मन सिनेमा के अग्र दूत रहे हैं और शेपर्ड के साथ उनकी यह फ़िल्म अमरीकी समाजवाद पर एक चुप चपिता कटाक्ष भी है। परिवार इस दौर में कहाँ खड़ा है? इच्छाएं और चिंताएं क्यों इंसान से ऊपर हो गयी हैं।
Robby Miller, जो के इस फ़िल्म के सिनेमेटोग्राफर हैं उनकी तारीफ भी बनती है। जिस सरलता के साथ उन्होंने कम्पोजीशन प्रस्तुत की हैं, वे कमाल हैं। वे शायद इकलौते सिनेमेटोग्राफर हैं जिन्होंने उस दौर के लगभग सभी इंडिपेंडेंट फिल्मकारों के साथ काम किया जैसे Lars von Trier, Jim
Jarmusch इत्यादि। पिछले साल ही अमरीकी सिनेमटोग्राफर्स की सोसाइटी ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सन्मानित किया ।
40 साल के ऊपर के फ़िल्म कैरियर के बाद आज भी, विम वेंडर्स का जोश कम नहीं हुआ। वह आज कल 3D तकनीक के साथ एक आर्किटेक्ट पर डॉक्यूमेंट्री बना रहे हैं। इसे सिनेमा के जादू ही कहा जाए के यह फ़िल्म को बनाने वाले को भी बोर नहीं होने देता। पिछले साल की सर्वोत्तम फ़िल्म भी 3D फ़िल्म थी नाम था goodbye to language। जिसे निर्देशित किया था 85 साल के Jean-Luc Godard ने। सलाम सिनेमा तुझे…।

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