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Cinema, Aspirins and Vultures – a Brazilian masterpiece

12628486_10205214757590812_7066068874899290663_oमार्सेलो गोमेज़ की “Cinema, Aspirins and Vultures” 2005 में आई ब्राज़ीलियाई भाषा की फ़िल्म है जिसे उस साल कान्स समारोह में दिखाया गया। यह एक रोड मूवी है। अपने ट्रक पर Aspirins बेचते एक जर्मन युवा “जोहान” की कहानी है जो ब्राज़ील की गरीबी से जूझ रही जनसँख्या को एस्पिरिन इस्तेमाल करते लोगों की फ़िल्म दिखा कर अपनी दवाई बेचता है। जोहान फ़िल्म प्रोजेक्शनिस्ट है और एस्पिरिन सेलर भी। दरअसल प्रपोगंडा फ़िल्म दिखा कर वो लोगों को aspirin के फायदा बताता है और फिर बेचता है।
फ़िल्म का समय काल 1942 का है जब विश्व युद्ध में जर्मन, जंग से जूझ रहा था। जोहान को जंग पसंद नहीं थी, और वो किसी के मौत का कारण नहीं बनना चाहता था। सो उसका वापिस जर्मन लौटना मौत के बराबर था। अब वो उत्तरी पूरब ब्राज़ील में घूम घूम कर एस्पिरिन बेच रहा है। उसके अनुसार भूख से मरना जंग में मरने से ज्यादा अच्छा है।
ब्राज़ील भूखमरी और गरीबी से जूझ रहा है जहां लोग पलायन कर रहे हैं। सफ़र के दौरान जोहान को एक ब्राज़ीलियाई युवा मिलता है, जो बेरोज़गार है और “रियो” जाना चाह रहा है। पर वो कुछ पैसों के बदले जोहान का असिस्टेंट बनने को राज़ी हो जाता है और फ़िल्म प्रोजेक्ट होते देख बहुत खुश होता है। वो कहता है “सिनेमा तोह ऐसे दिखता है, जैसे इसे दिखाकर तुम शैतान को भी बाइबिल बेच सकते हो”।
फ़िल्म के साथ साथ ट्रक भी आगे बढ़ता जाता है। जंग और बदत्तर होती जाती है। फ़िल्म जीवन के कई पहलुओं पर से हो कर गुज़रती है। जैसे जंग, बिमारी, भुखमरी, डर, मौत, सेक्स, जीत, जोश, उम्मीद इत्यादि।
फ़िल्म आखिर तक पहुँचती है के नायक के सामने एक अंतर्द्वंद्व छिड़ जाता है। अगर वो जर्मन लौटता है तोह जंग में मारे जाने का डर और अगर “रियो डे जनेरो” जाता है तोह गुलामों के कैंप में झोंक दिया जाएगा।
फ़िल्म का अंत दुखद पर बहुत भावपूर्ण है।
जोहान, ब्राज़ीलियाई युवक को कहता है के सोचो हम दोनों जंग के मैदान में एक दूसरे के दुश्मन हैं तोह क्या तुम मुझे मारते ? यह सीन विश्व सिनेमा में फिल्माए गए कमाल के सीनों में से एक है। उसके बाद दोनों अपनी अपनी किस्मत को लेकर आगे बढ़ते हैं और फ़िल्म जिस ease के साथ शुरू होती है, उस से कहीं ज्यादा सवाल देकर चली जाती है।
फ़िल्म को 2007 के अकादमी अवार्ड्स के लिए ब्राज़ील की तरफ से नामांकित किया गया था। मेरा ऐसा मानना है के दक्षिण अमरीकी सिनेमा के साथ अवार्ड्स के मामले में हमेशा से अन्याय हुआ है। अर्जेंटीना, चिली, पैराग्वे और वेनेन्ज़ुला से कमाल की फिल्में निकली हैं जो किसी भी मामले में फ्रेंच और अमेरिकन फिल्मों से कम नहीं है।
फ़िल्म के दोनों किरदार हालातों से भाग रहे हैं। एक जंग से दूर रहना चाहता है और दूसरा अपनी गरीबी से भाग रहा है। ट्रक सबसे बड़ा मेटाफर है। ब्राज़ीलियाई युवान फ़िल्म में एक जगह कहता है के “पूरी दुनिया जंगों से जूझ रही है और हम यहां पूरबी ब्राज़ील के खाली गाँव में घूमकर मज़े कर रहे हैं”।
खैर, मार्सेलो गोमेज़ की बतौर निर्देशक यह पहली फ़िल्म थी। इसके बाद उसने कुछ और फिल्में भी बनायीं। इस फ़िल्म के बाद मैं जरूर उनको देखना चाहूँगा।

– Gursimran Datla

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