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Kiarostami – gray sorrow in between.

किआरोस्तामी नही रहे।
वो अपने साथ उन हवाओं को भी ले गए जो विस्फोटों के साये में खड़े बर्फ और मिट्टी के पहाड़ों से आती थीं। वो उन आवाज़ों को भी ले गए जो चाहे कभी कभार ही, पर खालिस और कच्चे गलों से निकलती थीं।
वो उन चेहरों को भी ले गए जो अपनी गालों पर सदियों की बेरहम मारों को झेले हुए थी।

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किआरोस्तामी चले तोह गए पर पीछे बहुत सारी धरोहर छोड़ गए। छोटे छोटे बीजों को फूल होने तक का बाजरा छोड़ गए ।पानी छोड़ गए ।

कल जरूर किआरोस्तामी Taste of Cherry के उसी ट्रक में सवार हुए होंगे और ऐसे ही मृत्यु को ढून्ढ रहे होंगे। या certified copy सरीखे अपनी हमनवा संग सवार जहां भर घूम रहे होंगे। जूलिएट मिनोज़ ने क्यों काम किया होगा उनके साथ ? क्योंकि … वो किआरोस्तामी थे।

तमाम फिल्मकारों की तरह किआरोस्तामी भी कैंसर से मरे। उनका मरना हुआ तोह कुछ बेहतरीन दिमागों को आज पता चला के किआरोस्तामी कौन था।ऐसा कौन आदमी था ?

Iranian filmmaker died at 76।
Google पर Abbas Kiarostami लिखने से यही लिखा हुआ आ रहा है पहले।

किआरोस्तामी चले गए हमें छोड़ गए सर्टिफाइड कॉपियों के साथ, साथ ले जाने वाली हवा के साथ। क्लोज-उप के साथ। जैतून के पेड़ों साथ । लैला, शिरीन औए केलिद के साथ। हम छोड़ गए यह ढूँढने के लिए के मेरे दोस्त का घर कहाँ है। ओह किआरोस्तामी ! अब दोस्त नहीं मिलते।

तुम्हारी इन पक्तियों के साथ तुम्हें नमन –

Morning is white,
evening is black,
a gray sorrow
in between.

عباس کیارستمی (Abbas Kiarostami),گرگی در کمین / A Wolf Lying in Wait

– Gursimran Datla

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