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देश प्रेमियों के नाम एक खुला ख़त

अंधी श्रद्धा कहीं नहीं लेकर जाती। लोग तो ईश्वर, अल्लाह पर भी इलज़ाम लगा देते हैं, तोह तुम्हारी श्रद्धा तुम्हें किस किताब में हीरो बना देगी ? कौन से नोटों पर तुम्हारी तस्वीर लगा देगी ? अपने आकाओं के दम पर 5 साल चमक जाओगे 10 साल चमक जाओगे पर उसके बाद आना तोह आटे, दाल और तेल जैसी चीज़ों पर ही होगा। यहाँ, इस मुद्दे पर तुम्हारे संत, तुम्हारे गुरु बहुत भुलकड़ हैं। वो बाकियों को बाद में भूलेंगे पर सबसे पहले तुम्हें अपने आस पास से दफा करेंगे। तुम जो उनके लिए जेल तक जा आओगे, दुसरे लोगों को मारोगे, जलाओगे इत्यादि। क्यूंकि कुत्ता चाहे कितना भी पालतू हो, पर उसके काटने का डर उसके मालिक को भी रहता है। तुम्हारी अंधी श्रद्धा में गहराई तुम्हें उतना ही खूंखार बना रही है। यह मत भूलना, के मुल्क इंसानों के लिए होते हैं, इंसान मुल्कों के लिए नहीं।

यह भी मत भूलना के इस मुल्क में पैदा होना तुम्हारी चॉइस नहीं थी, तुम बांग्लादेश, पकिस्तान, अमेरिका, फ्रांस या जकार्ता, कहीं भी गिर सकते थे। तोह इस से यह साबित हो जाता है के तुम कोई ज्यादा ई देश भगत नहीं हो। तुम्हारे साथ, तुमसे पहले, और तुम्हारे बाद पैदा होने वाले लोग भी उतने ही यहाँ के वासी हैं जितने तुम। तुम्हारे बाप दादा ने अपनी वसीयत में भारत को तुम्हें एकेले नहीं सोंपा। देश की चिंता छोड़ दो,अपने जीवन पर ध्यान दो। जो के बुरे तरीके से अस्त व्यस्त हुआ पड़ा है। बीवी, गर्लफ्रेंड तुम्हारी तुम्हारा कहा मानती नहीं और तुम कलाकारों, लेखकों को देशप्रेम सिखाने चले हो।

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याद करो जब चोरी चोरी तुम ऑनलाइन वेबसाइट से ‘मसाज आयल’ और’यंत्र’ मंगवाते हो, क्या तब भी तुम देशप्रेमी होते हो ? या जब तुम किसी हीरोइन को इमेजिन करते हुए खुद के साथ कोई योन क्रिया करते हो, क्या तब भी तुम्हें देशप्रेम का ख्याल रहता है ?

एसेहज मत हो प्रेमी, मेरा यह सब तुम्हें कहने का एक ही मकसद है, के देशप्रेम उतना ही निझी मसला है जितना आयल और योन-क्रिया। भारत माता की जय बोलना, वंदे मातरम् बोलना देशप्रेम नहीं है। भारत, माता भी नहीं है। यह एक जगह है जहां रहकर तुम मानव के रूप में खुद को खोजो और साथ के मानवों के साथ भी स्नेह से रहो। बिलकुल बाकी और जगहों की तरह। वैसे भी सिंपल सी बात है दोस्त। अगर भारत माता होती तोह माँ दी गाली देने वाला देशद्रोही होता। और पूरा उत्तर भारत जेल में होता। सेडीशन लॉ के तहेत।
उम्मीद की जानी चाहिये के देश प्रेम से ज्यादा लोग मानव प्रेम की और अग्रसर होंगे और तुम्हारी आने वाली नसलें देश जात मज़हब से आगे बढ़ कर मानव संवेदना और स्नेह की तरफ बढ़ेंगी। तुम आज संभल जाओ हो सकता है यह बदलाव हमें इसी जनम में देखने को मिल जाए। जो मरने के बाद मिले, उसका मिलना कोई मिलना थोड़ी है।

तुम्हारी ही साथ साँस लेने वाला एक मानव

गुरसिमरन दातला।

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