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Bergman’s last Episode of Isolation – The Passion of Anna

इंगमार बर्गमैन की “द पैशन ऑफ़ एना” इंसानी रिश्तों, उसमें बने सच झूठ के तानों बानों और स्वयं की सचाई से रूबरू होने पर बनी कमाल की फ़िल्म है। इस फ़िल्म के बारे में कुछ भी लिखना बहुत मुश्किल है। यह फ़िल्म बहुत ही मुश्किल फ़िल्म है। अलगाववाद और त्रासदी की पृष्ठभूमि लिए 1969 में बनी स्वीडिश भाषा की यह ड्रामा फ़िल्म बर्गमैन की ही ‘ऑवर ऑफ़ द वुल्फ’ और ‘शेम’ की अगली कड़ी है। यह तमाम फिल्में आंतरिक अलगाववाद पर निर्धारित हैं और कई रहस्यमय तत्व समेटे हुए है।

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फ़िल्म के मुख्य किरदारों में बर्गमैन के ही पुराने अभिनेता ‘मैक्स वोन सिडौ’ ‘आंद्रेअस’ के किरदार में नज़र आते हैं । “द पैशन ऑफ़ एना” इस ट्राइलॉजी की इकलौती कलर फ़िल्म है। कलर फ़िल्म में ‘मैक्स वोन सिडौ’ काफी जवान लगते हैं और लंबे चेहरे पर पड़ते उनके भाव कलर में और बेहतरीन और सटीक लगते हैं। टाइटल रोले एना के किरदार के लिए बर्गमैन ने लिव उल्लमन् को चुना। बर्गमैन और लिव समानार्थी हैं और बर्गमैन की फिल्में लिव के बिना अधुरी हैं। फिल्में क्या… ज़िन्दगी।

लिव के बिना बर्गमैन का ज़िक्र करना उनके साथ ना-इंसाफी करने जैसा है। खैर, “द पैशन ऑफ़ एना” फ़िल्म के खत्म होने के बाद भी लिव उल्लमन् की गहरी नीली आँखें और क्लाइमेक्स सीन में उनका लाल स्कार्फ आपको लंबे समय तक याद रह सकता है। इस फ़िल्म को लिव के रहस्यमय किरदार के लिए भी याद रखा जा सकता है।
बर्गन की फिल्मों का ही एक जाना माना चेहरा ‘बीबी एंडरसन’ इस फ़िल्म में ईवा के किरदार में है। ईवा पति की बेरुखी से दुखी है और कंधे के रूप में ‘आंद्रेअस’ को पकड़ती हैं। एरलैंड जोसेफसोन ( किरदार का नाम ‘एलिस’) ईवा के पति के किरदार में हैं जो के एक फोटोग्राफर है। एलिस, ईवा और आंद्रेअस के बीच के रिश्ते के बारे में जानता है पर अनजान बना रहना ही बेहतरी समझता है। कुल मिला कर फ़िल्म के हर किरदार ने पूरी फ़िल्म में अपने रहस्य को बरकरार रखा है जो आखिर तक फ़िल्म को बांधे रखता है।

फ़िल्म की सारी शूटिंग स्वीडन के ही एक छोटे से आइलैंड पर हुयी है, जहां पर बर्गमैन ने अपनी ज्यादातर फिल्में शूट की हैं और उन्होंने अपने जीवन  का सारा समय इसी जगह गुज़ारा भी। फ़िल्म की मुख्य कहानी के साथ कुछ सबटेस्ट भी फ़िल्म के साथ चलते रहते हैं। जो फ़िल्म के नैरेटिव स्ट्रक्चर को विराम देते रहते हैं। फ़िल्म के चारो किरदार बीच बीच में अपने करैक्टर रोल के बारे में बातचीत करते रहते हैं। उसी आइलैंड पर कोई अज्ञात व्यक्ति जानवरों और परिंदों को बुरी तरह से मारता रहता है। एक पागल पर इन हत्याओं का शक जाता है और वो डर से ख़ुदकुशी कर लेता है। फ़िल्म में ऐसे प्राकरण फ़िल्म के किरदारों की मानसिकता को दर्शाते हैं।
‘आंद्रेअस’, जो एक साल से ‘एना’ के साथ रह रहा था, अब उस से अलग होना चाह रहा है। एना, जो अपने पति और बच्चे के प्रेम गीत सुना कर आंद्रेअस की हमदर्दी ले रही थी, अचानक खुद उस वयोग की मुजरिम हो उठती है। यह घुमावदार मोड़ ही फ़िल्म के किरदारों को रियल और ठोस बनाते हैं। कोई भी अच्छा हमेशा अच्छा नहीं ना कोई बुरा हमेशा बुरा। हालात की खेल के आगे आदमी अपना सर्वश्रेष्ठ करता है, बस, कभी वो बुरा बन जाता कभी अच्छा।

Bibi Anderson,Bergman and Liv on film set.
Bibi Anderson,Bergman and Liv on film set.

इस फ़िल्म का अंत बड़ा ही प्रसिद्ध है। तकनीक के मामले में स्यान न्यक्विस्ट ( फ़िल्म के सिनेमेटोग्राफर और बेर्गमान के लंबे समय के जोड़ीदार) का वो शॉट उनका सर्वश्रेष्ठ है। बहुत सारे फ़िल्म क्रिटिक उस शॉट को आंद्रेअस के अंतर मन का मनोवज्ञानिक विघटन ( dissolution ) मानते हैं और कुछ इस शॉट की बर्गमैन की इस ट्राइलॉजी का समूहक अंत। यह सीन फ़िल्म के किरदारों के अंदर को एक मेटाफर के रूप में भी परस्तूत करता है। सबकी अपनी अपनी राय है।

1971 में दिए एक इंटरव्यू में बर्गमैन ने माना के उनका नैरेटिव तोड़ कर बीच में अलग अलग प्राकरण डालने का आईडिया गलत था। वो इससे खुश नही थे। उनका मानना था के अदाकार इन इंटरव्यू को ठीक से अंजाम नहीं दे पाये और वो जो चाहते थे वो परदे पर परस्तुत नही हो पाया। खैर इसके बावजूद यह फ़िल्म एक महान और सदाबहार फ़िल्म होने का सारा दम रखती है।

इस कड़ी की पिछली दो फिल्मों में भी ‘लिव’ और ‘वोन सिडौ’ प्रेमी प्रेमिका का किरदार निभाते हैं, लेकिन इस फ़िल्म में उनके बीच का रिश्ता और भावना बहुत ही यथार्थवादी और बहूआयामी ( multi-faceted ) हो उठता है।

कुल मिला कर फ़िल्म के सारे किरदार बिरहा और एकेलेपन से पीड़ित हैं और किसी के साथ को, या कहें के सच्चाई के जीवन जीने को अपना अपना सर्वोत्तम प्रयत्न करते हैं। यही “द पैशन ऑफ़ एना” का प्रसंग है। खूबसूरत और रहस्मय विसुअल्स सिरजन के लिए स्वेन न्यक्विस्ट की भी तारीफ करने बनती है।

फ़िल्म अपने स्वरुप और रिथम् के चलते रूसी फिल्मकार आंद्रेई तारकोवस्की की फ़िल्म “द सैक्रिफाइस” और पोलिश फिल्मकार किएस्लोव्स्की की फ़िल्म “ब्लू” की भी याद ताज़ा करा देती है। “ब्लू” में जूली एक कार एक्सीडेंट में अपना बच्चा और पति खो देती है और इधर “द पैशन ऑफ़ एना” में ‘एना’।

बर्गमैन एक फिल्मकार से ज्यादा एक जादूगर थे जिनकी बनाई हुयी फिल्में सिनेमा के इतहास में सदा के लिए दर्ज हो गयीं और उनके गढ़े गए विसुअल्स सदा के लिए हमारा दिमाग में बस गए।

– Gursimran Datla ।

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