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Days Of Heaven – visual treasure of Malick

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बिना शक Days Of Heaven टेरेंस मलिक की सबसे खूबसूरत फिल्म है और अमरीकी सिनेमा के घर से निकली बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस फ़िल्म ने मलिक को उन निर्देशकों की कतार में खड़ा कर दिया जिन्होंने दार्शनिक परिकल्पना से कहानी को स्वपन बना दिया हो। इस फ़िल्म के visuals का एक एक फ्रेम कमाल का है। फ़िल्म का लगभग सारा हिस्सा मैजिक ऑवर करके जाने जाते समय में शूट हुआ है।
मैजिक ऑवर उस समय को बोलते है जो सुबह के वक़्त सूरज चढ़ने के समय लालिमा आसमान में उठती है और यही दृश्य शाम को सूरज के नीचे जाते हुए भी बनता है। कुल मिला कर वो समय जो सूरज डूबने और रात होने के बीच होता है। इस समय रौशनी बड़ी ही सॉफ्ट होती है और इसी रौशनी में फिल्माए गए दृश्य इस फ़िल्म को एक त्रासदिक परिकल्पना तक ले जाते हैं। फ़िल्म का लैंडस्केप किसी चित्रकार के दिमाग की उपज से निकला लगता है ।

Days of Heaven 1
इस फ़िल्म को थिएटर से निकलने से पहले कई मुसीबतों का चेहरा देखना पड़ा। जिसमें प्रोड्यूसर को अपने घर गिरवी रखने से लेकर सिनेमेटोग्राफर अलमेन्द्रोस के ऊपर कैमरा चलाने का प्रतिबन्ध भी शामिल हुआ। फ़िल्म की एडिटिंग ने करीबन 3 साल का समय लिया तब तक कलाकारों से दुरी नयी फिल्में कर के उनकी रिलीज़ भी देख ली थी।

टेरेंस की यह दूसरी फ़िल्म थी। और यह फ़िल्म उनके लिए किसी दुखांत से कम नही थी। इस फ़िल्म के बाद उन्हें अगली फ़िल्म बनाने के लिए 20 साल का वक्फा लगा। पर उन्होंने कला के प्रति अपनी ईमानदारी बरकरार रखी । वास्तविकता भर यह काव्य अपनी सर्वो उच्चतम भरी फोटोग्राफी के चलते दुनिया की बेहतरीन फिल्मों में शुमार हो गया है।

Detailed essay in English on this film

Days of Heaven 1910 में एक मिल मजदूरी करते पात्र की नादानी भरी कहानी है जो गलती से अपने मालिक का क़त्ल कर देता है। वहाँ से अपनी प्रेमिका और छोटी बहन के साथ भाग कर आ टेक्सास के एक बड़े किसान के खेतों में 3 डॉलर प्रति दिन के हिसाब से काम करना शुरू कर देता है। बड़े बनने के सपने उसे कई गलत निर्णय दिलाते हैं और वो एक दुखांत अंत की और पहुँचता है। तिकोन्य प्रेम, खेत्रों में मकोड़ों का जाल, और फिर पूरी फसल को लगती आग, मालिक ने हर एक सेंटीमेंटस्वपन की तरह गढ़ा है।

Click to watch the trailer of Days Of Heaven
मलिक की यह फ़िल्म 70 के दशक के सिने इतहास का ताज है। इस फ़िल्म को बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए ऑस्कर से नवाज़ा गया।

Days of Heaven की गति में एक निरंतरता है। वो गति जो सब में है। चाहे वो फ़िल्म के किरदारों की हो, कुदरत की हो या मशीनों की हो। फ़िल्म के बिम्ब और भावों के बीच का मिलान फ़िल्म को समय से परे बना देता है। मालिक अल्पकालिक के सच्चे कवी हैं जिन्होंने फ़िल्म को एक रिथ्म के साथ गढ़ा है।

Detailed Analysis of Days Of Heaven

Days of Heaven एक उदास और खालीपन सिनेमेटिक अनुभव है जिसे चमत्कारी ढंग से सिरजा गया है। ऐसी फिल्मों में भाषा अक्सर एक औपचारिकता रह जाती है क्योंकि परदे पर रौशनी जिस तरीके से प्रस्तुत हो रही होती है वो सर्वोत्तम भाषा हो उठती है।
– Gursimran Datla

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