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बदज़ार् देशों की बदनसीब औलादें

बेलजियम भूखमरी और बेरोज़गारी से जूझ रहा था तोह वह अपनी साइकिल पे अपने पिता को ढूंढ रहा था। उसी पिता ने उसे देखने तक को मना कर दिया, ज़िंदगी की दूसरी शुरुआत  में अपनी ही गलती को ठुकरा दिया।  यह गरीबी तंगहाली चार्ली चैपलिन के सिनेमा की याद दिलाती है , पर यह उसकी तरह हसाती नहीं है, स्तब्ध कर देती है। छोटे छोटे देशों की विश्वसनीय अदाकारी ईमानदारी से कहानी कहने की कला ही ”The Kid with a Bike’ जैसी फिल्म को वर्ल्ड सिनेमा की केटेगरी मैं ला खड़ा करती है। वैसे भी दर्देंने भाइयों को इस तरह डॉक्यूमेंट्री स्टाइल मैं फिक्शन सिनेमा बनाने मैं महारत हासिल है। कहानी से कभी कभी वह केन लोच ( ब्रिटिश फिल्मकार ) की याद दिलाते हैं। दर्देंने भाई ( Jean-Pierre Dardenne & Luc Dardenne ) बेल्जियम में youth and unemployment विषय को बाखूबी पेश करते हैं।’The Kid with a Bike’ में  Thomas Doret  ने उम्दा अभिनय की चाप छोड़ी है।

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एक तरफ जहां दुनिया के सिनेमॅटोग्राफर्स, फिल्म सिनेमेटोग्राफी और हाइब्रिड सिनेमेटोग्राफी पे डिबेट कर रहे हैं वहीँ पर  Alain Marcoen इस फिल्म मैं अपनी ही तरह का काम कर जाते हैं। इस फिल्म को 2011 के कांन्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स अवार्ड से नवाज़ा  जा चुका है।  दा प्रॉमिस , दा चाइल्ड ,  दा सन दरदनने भाईयों को उम्दा फिल्में हैं।
– Gursimran Datla

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