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कुर्द लोगों की जुबां बनता – सिनेमा

पिछले कुछ दिनों से कुर्द लोगों पर बनी कुछ कमाल की फिल्मों से रूबरू हुआ हूँ। यह सिनेमा इस लिए भी मायने रखता है क्यूंकि कहानी कहने की कला की सबसे पुरानी और मूल जड़ इसी हिस्से से निकलती है। दुनिया के ये हिस्सा किस्से और वाक्ययों से भरा पड़ा है। ईरान ने दुनिया को बेहतरीन फिल्में दी है और इराक का इसमें उतना ही योगदान है। जंग और इंतकाम की आग में झुलस रहे दोनों मुल्क जिनके ज्यादातर हिस्से रेत और बंजर ज़मीन से ढके हैं, वहाँ से ऐसी उम्दा और दार्शनिक काव्य फिल्मों का आना इस माध्यम की प्रमाणिकता और प्रत्यक्षता को दर्शाता है। यकीनन कैमरा बन्दूक से तेज़ मार रखता है। कुछ बंजर और बेज़ार लोग इसी जंग के दौरान किसी की तलाश में निकलते हैं और कैमरा उनकी नज़र से वहाँ के इलाकों, लोगों, जानवरों, कंद मूल सबका चित्रण करता जाता है। ऐसी ही दो उम्दा फिल्मों का ज़िक्र करने जा रहा हूँ।

Son of Babylon {Arabic: ابن بابل‎}

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सन ऑफ़ बेबीलोन 2010 में आई मोहम्मद अल दरादजी द्वारा निर्देशित इराक़ी फिल्म है। इस फिल्म के ग़ज़ब पार्श्व संगीत और अत्यंत खूबसूरत सिनेमेटोग्राफी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है के फिल्म को इराक की तरफ से 83 वें अकादमी पुरुस्कारों में नामांकित किया गया।
2003 साल है। 15 दिन पहले सद्दाम हुसैन का राज खत्म हो चूका है। यह पता चलने पर के युद्ध के दौरान बंदी बनाये गए लोग दक्षिणी इराक में जीवित मिले हैं,12 साल का अहमद अपनी दादी के साथ उत्तरी इराक से अपने पिता को खोजने के लिए निकलता है जिसे 1991 में खाड़ी युद्ध के दौरान बंदी बना लिया गया था। कुर्दिस्तान की पहाड़ियों से बेबीलोन के मरूथल तक यह दादी पोते अपना सफर जारी रखते हैं। फिल्म के निर्देशक दरारजी का कहना है के यह फिल्म इराक के लिए है। मेरे परिवार के लिए है। इस फिल्म को बनने में 4 साल का वक़्त लगा और सिर्फ एक फिल्म से ज्यादा यह उन लोगों की अनसुनी आवाज़ें थी जो बारूद की आवाज़ में कहीं दब गयीं थीं। त्रासदी तब दिखती है जब अंग्रेजी, अरबी और कुर्द भाषा को खत्म करने पर तुली हो।

Trailer of Son of Babylon

Bekas

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2012 में आई बेकस { जंग की वजह से अनाथ } कर्ज़न कादिर द्वारा निर्देशित कुर्द भाषा की फिल्म है। फिल्म 2 अनाथ भाइयों की कहानी है जो गधे पर बैठ अमेरिका जाने के लिए निकलते हैं। उनका सपना सुपरमैन से मिलने का है। क्यूंकि उन्हें विश्वास है के सुपरमैन सद्दाम हुसैन को मार डालेगा क्यूंकि सद्दाम ने उनके माँ-पिता की मारा है। कादिर का जनम उसी दौर में हुआ जब इराक जंग के जूनून में था। फिर बाद में उनका परिवार स्वीडन शिफ्ट हो गया। लेकिन उनके मन पर जो जंग की छाप थी वो बेकस में नज़र आती है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी, आर्ट कमाल की है।

Trailer of Bekas
दोनों फिल्में रोड मूवी की तरह है। इराक, ईरान और कुर्दिस्तान की सड़कें पहाड़ और लोग आपको वो दे जाते हैं जो और सिनेमा के किरदार नहीं दे सकते।

you can read more about kurd films here

– Gursimran Datla

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