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कुदरत का चक्र

कुछ अपने लिए। लीक से हट के

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चिड़ियाँ झुंड बना के शाम में घर को मुड़ती हैं
पीली सरसों गिरते सूरज को अलविदा कहती हैं
कैसे आसमानी लाली धीरे धीरे जाती है
लगता है जैसे,
दिन पूछ कर ढलता है
और शाम बता कर आती है।
जब हरे हरे पौधों पर हलकी ओस जमने लगे
जब वातावरण में हलकी हवा चलने लगे
और जहां आस्मां धरती से मिलता हो,
वहाँ नीली लकीर दिखने लगे
तोह हैरान होना थोडा कुदरत पर
क्यों यह कुदरत मुस्कुराती है
लगता है जैसे,
दिन पूछ कर ढलता है
और शाम  बता कर आती है।
यह नज़ारा तोह देखे मेरे दोस्तों
कुछ पल अँधेरे के बाद फिर यह चक्र दोहराया जाएगा
चिड़ियाँ झुण्ड बना कर लौटेंगी
पीली सरसों उठते हुए सूरज को सलामी देगी
और आसमानी लाली एक बार फिर लौटेगी
यह नज़ारा याद रखोगे
तोह ज़िन्दगी हमेशा खिलखिलायेगी
दिन पूछ कर ढलेगा
और शाम  बता कर आएगी।
-Gursimran Datla

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