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ताज और ओबामा दम्पति

किन्ही कारणों के चलते मिस्टर एंड मिस्सिज ओबामा ताज महल नहीं देख पाये। क्या ऐसा मुमकिन था के ओबामा अकेले अपनी अगली यात्रा पर निकल जाते और मिशेल पीछे ताज महल देखती ? हर औरत ताज देखना चाहती है क्योंकि वो इस बात से हैरान है के कैसे एक शौहर अपनी पत्नी के लिए इतना भव्य महल रच सकता है। कैसे कोई किसी को इतना चाह सकता है ? कहीं न कहीं उसके मन में भी यह जिज्ञासा उठती है के उसका पति भी उसके लिए ऐसा कुछ करे के रहती दुनिया, उन दोनों के प्रेम को याद रखे।भले ही औरत इस फैक्ट को भी भूलने के लिए तयार है के राजा खुर्रम ( शाह जहां ) की चाहे 15-20 बीवियां थी और जिसके लिए ताज बनाया वह तीसरे नम्बर वाली थी। हो सकता है औरत को इस बात से कोई फर्क न पड़ता हो के उसके पति के कितनी औरतों से सम्बन्ध हैं पर जो उसके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है वो यह के पति उन सब में सबसे ज्यादा उसे ही प्यार करे। खैर..
ताज महल की तुलना गाहे ब-गाहे औरत से होती रहती है। मसलन ताज को भी हुस्न से लबरेज़ होने में 22 साल लगे और ताज भी नारी के स्वभाव के भाँते दिन में 3 दफा रंग बदलता है। वैसे ही जैसे एक सुंदरी सूरज के किरण में गुलाब सूही होती है ताज भी सुबह गुलाबी, दिन में सफ़ेद और चंदरमाह की सित रौशनी में सुनहरी हो जाता है। वैसे भी चाँद, औरत के हुस्न में अंगडाइयों भर देता है।
हो सकता है के मिशेल, हिन्दुस्तान के दौरे पर आने से पहले, वाइट हाउस में बैठ ताज महल की तसवीरें निहारती रहीं हों और अपने प्रिय बराक को कहती हों “डार्लिंग, मुझे ताज देखना है”। हो सकता है के ओबामा ने पूछ लिया हो ‘हनी, व्हाट इस ताज ?”

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अगर इतना हुआ होगा तोह फिर उसके बाद तोह यह निश्चित रूप से हुआ होगा के हनी ने डार्लिंग को 2-3 घंटे का ताज महल के ऊपर लेक्चर दिया हो। इंटरनेट पे एकत्रित की सारी नॉलेज वहीँ झोंक दी हो। इस के बाद ओबामा ने धीमे से खुद के पति होने का दुःख करते हुये ही सही, पर फ़र्ज़ निभाया होगा यह कह कर के “वाओ हनी !!! हम टाज़ देखने जलूल जाएगा”।
वैसे कई मायनों में ओबामा कपल का ताज ना देखना भी मोदी हित में हुआ। क्योंकि बराबर्ता और निरपेक्षता की बात करते मुल्क में, ताज महल के अंदर खुर्रम की बड़ी मज़ार और मुमताज़ की छोटी मज़ार देखते तोह पता नहीं मिशेल के इस सवाल का मोदी क्या जवाब दे पाते।
वैसे अगर ओबामा दम्पति ताज महल चले जाते तोह आज शाहरुख़ खान,मिल्खा सिंह और मेरी कॉम की तरह ‘इसा शिराज़ी’ और ‘अहमद लाहौरी’ ( ताज महल के प्रमुख वास्तुकार ) भी मोदी का तेह दिल से शुक्रिया करते। क्योंकि हमारे मुल्क में बहार से आये लोग जब हमारी तारीफ करते तोह ही उसे हम अपना गौरव समझते हैं।
मिशेल को दूसरा दुःख पिछली बार की तरह भंगड़ा ना करने का है। यह भी मुमकिन है के भारत आने से पहले उन्होंने हिन्द अवाम को खुश करने के लिए भंगड़ा क्लासेज ली हों और बराक भी घर पे “लुंगी डांस” पर थिरके हों। पर यहां उन्हें सिर्फ गुजराती कढ़ी इत्यादि व्यंजनों से ही संतुष्ट होना पड़ा।खैर..
अब जब ओबामा दम्पति अमरीका लौट ही चुके हैं तोह हो सकता है के कई दिनों तक दोनों इन्ही यादों में रहे। ओबामा भारत से ज्यादा मोदी को याद करें और मिशेल ताज न देख पाने के गम को भूलने के लिए अपना wifi disabled कर दें। मुमकिन है…

गुरसिमरन दातला।

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